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हमारे बारे में
सी-डैक, नोएडा- पहले भारतीय इलेक्ट्रॉनिकी अनुसंधान एवं विकास केन्द्र (ई.आर.एंड डी.सी.आई) के नाम से जाना जाता था- प्रगत संगणन विकास केन्द्र, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की एक वैज्ञानिक संस्था की संघटक इकाई है। यह बहु-परिसरीय केन्द्र है जिसके दो परिसर हैं (अनुसंधान एवं विकास तथा शैक्षणिक) जो कि एक दूसरे से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसका निर्मित क्षेत्र कुल मिलाकर लगभग 17000 वर्ग मीटर है। इसमें इस समय लगभग 400 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनमें से 60 प्रतिशत से भी अधिक इंजीनियर हैं।
सन् 1994 में अपनी स्थापना के समय से ही यह केन्द्र ग्राहक की विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अनुप्रयोग उन्मुख डिजाइन एवं विकास के क्षेत्र में कार्य करता आ रहा है। इन वर्षों के दौरान इसने स्वास्थ्य सूचना विज्ञान, एम्बेडेड सिस्टम, भाषा कम्प्यूटिंग, ई-प्रशासन के क्षेत्रों में सक्षमता, विशेषज्ञता एवं अपार अनुभव प्राप्त किया है। इनसे अनुसंधान एवं विकास स्कंध के चार कार्यक्षेत्र बनते हैं।
शैक्षणिक स्कंध उन्नत सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में गुणवत्ता युक्त जनशक्ति तैयार करने की ओर ध्यान केन्द्रित करता है। यह चार स्कूलों के रूप में संगठित है अर्थात्- स्कूल ऑफ आई.टी (एस.ओ.आई.टी.), स्कूल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स(एस.ओ.ई.), स्कूल ऑफ मैनेजमेंट(एस.ओ.एम.) तथा फिनिशिंग स्कूल(एफ.एस.)। स्कूल ऑफ आई.टी. कम्प्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी में एम.सी.ए. तथा एम.टेक. कोर्स कराता है। स्कूल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स वीएलएसआई डिजाइन में एम.टेक. कोर्स और वायरलेस, एम्बेडेड सिस्टम तथा हार्डवेयर डिजाइन में अनेक स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्रोग्राम कराता है। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट सॉफ्टेयर इंटरप्राइज मैनेजमेंट में एम.बी.ए. कोर्स कराता है। ये नई दिल्ली स्थित गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। फिनिशिंग स्कूल अनेक उन्नत विषयों में विभिन्न स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स कराता है।
सी-डैक, नोएडा शिक्षा, अनुसंधान एवं उत्पाद विकास के बीच तालमेल पर बल देता है। यह फील्ड में अपने सिस्टमों की विश्वसनीयता और अनुरक्षणता को प्रमुख महत्व देता है। इस केन्द्र के प्रौद्योगिकी विकास में किए गए कार्यों पर उपर्युक्त चारों स्कूलों के पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है और इसे धन प्रमुखत: भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों एवं अन्य एजेंसियों से प्राप्त होता है।
| पिछली बार नवीनीकृत
: 9 जनवरी 2009
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